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Sunday, 19 July 2020

वीकेंड लॉकडाउन का ‘दिव्य ज्ञान’


लॉकडाउन का वीकेंड एडिशन

अनलॉक के बाद लॉकडाउन रिटर्न्स

Corona Virus

कोरोना बड़ी गंभीर बीमारी है, कहां से, किस रूप में शरीर के अंदर पहुंच जाए ये पता ही नहीं चलता। और तो और इसकी कोई दवा या वैक्सीन भी अबतक नहीं बनी है। यही सुन-सुनकर मार्च से जून तक का समय निकाल लिया। काम-धंधा सब बंद, घर से निकलना बंद। जनता कर्फ्यू से लेकर लॉकडाउन के चार फेज देख लिए। फिर आया जुलाई का महीना, जिसमें दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। अब सिर्फ मैं ही अकेला भाग्यशाली क्यों रहूं। सो थोड़ा ज्ञान का रस आप भी लीजिए।  

Corona Lockdown

क्या आपको पता है कि जिस कोरोना वायरस से डर-डरकर आपने तीन महीने बिताए, वो कोरोना सिर्फ सैटरडे और संडे को ही लोगों को अपना शिकार बनाता है। हमारे यूपी में कोरोना सोमवार से लेकर शुक्रवार तक आराम करता है। हफ्ते के पांच दिन उसकी मजाल ही नहीं है कि वो आपके पास भी फटके। लेकिन शुक्रवार की रात गहराते ही वो शहंशाह स्टाइल में अंधेरी रातों में सुनसान राहों परनिकल पड़ता है। फिर तो शनिवार और रविवार को कोरोना का राज चलता है। भई वायरस विदेशी है तो उसका वर्क फंडा भी थोड़ा अलग होगा ना। आप कहेंगे कि ये क्या मजाक है! मैं भला क्यों मजाक करूंगा। हमारे उत्तर प्रदेश में कोरोना का वर्क स्टाइल यही है।

Corona

पिछले हफ्ते जब हमारे सीएम साहब योगी जी की सरकार ने मिनी लॉकडाउन का ऐलान किया तो दिमाग मानो घूम गया। रोज-रोज कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, खतरा बढ़ रहा है लेकिन सरकार दो कदम आगे एक कदम पीछे के फॉर्मूले को हथियार बनाकर लड़ रही है। सरकार ने कहा कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए ये फैसला लिया गया है। अब यूपी में हर हफ्ते शनिवार, रविवार को बाजार, हाट, सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे लेकिन गांवों में कारखाने खुले रहेंगे, हाईवे और एक्सप्रेसवे जैसे बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट चलते रहेंगे। और तो और माल ढोने वाली गाड़ियां भी चलेंगी और उनके लिए हाईवे पर ढाबे भी खुले रहेंगे। यूपी सरकार के वीकेंड लॉकडाउन में मंदिर-मस्जिद और बाकी धार्मिक स्थल भी खुले रहेंगे। कहने का मतलब ये हुआ कि इन जगहों पर वीकेंड में भी कोरोना आपका बाल बांका नहीं कर पाएगा। ऐसा दिव्य ज्ञान तो सदियों में एक बार ही मिलता है।


Monday, 6 July 2020

चीन के खिलाफ ट्रंपकार्ड राफेल



वो आ रहा है


गेमचेंजर राफेल का स्वागत नहीं करेंगे आप


Rafale Indian Air Force 
इक्कीसवीं शताब्दी की दुनिया में जंग वही देश जीतेगा जिसकी वायुसेना में ताकत होगी और आधुनिक लड़ाकू जहाज होंगे। ये कोई रॉकेट साइंस का गूढ़ रहस्य नहीं है, तमाम डिफेंस एक्सपर्ट ये बात कहते रहे हैं। पाकिस्तान से दशकों पुरानी दुश्मनी और चीन से हालिया तनातनी के बीच इंडियन एयरफोर्स और उसके तरकश में आने वाले ब्रह्मास्त्र राफेल की चर्चा आजकल जोरों पर है।

Rafale Fighter Plane

राफेल का इंतजार तो भारत साल 2012 से कर रहा है जब मनमोहन सिंह की सरकार ने 126 लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया था। बाद में 126 विमानों का ऑर्डर रद्द करके नरेंद्र मोदी की सरकार ने साल 2016 में पूरी तरह से तैयार 36 ऑपरेशन रेडी विमानों का सौदा किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल 8 अक्टूबर को फ्रांस में राफेल की डिलीवरी ली थी। इस महीने के आखिर में दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक लड़ाकू विमानों में शुमार राफेल भारत के आसमान में उड़ान भरेगा और उसकी गर्जना दुश्मनों के दिलों में खौफ भर देगी।

Rafale

राफेल में ऐसा क्या है जो उसे चीन और पाकिस्तान की एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों से अलग बनाता है। राफेल की रफ्तार 2000 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा है और इसकी रेंज करीब 3700 किलोमीटर है। हिमालय की ऊंची चोटियां हों या राजस्थान का रेगिस्तान, राफेल हर मौसम और हर परिस्थिति में बेहद ही घातक है। भारत को मिलने वाला राफेल बियॉन्ड रेंज विजुअल मिसाइल से लैस है। राफेल में लगा रडार इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग से थ्रीडी मैपिंग करके रियल टाइम में दुश्मन की पोजिशन पता कर लेता है। सीधे शब्दों में समझना हो तो इस विमान में लगी मिसाइल दुश्मन के प्लेन को बिना देखे सीधे फायर करके उसे जमीन पर गिरा सकती है। जो राफेल विमान भारत आ रहा है उसमें दुनिया की सबसे आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मीटियॉर मिसाइल लगी होगी। ये मिसाइल फिलहाल एशिया के किसी भी देश की वायुसेना के पास नहीं है। ना चीन और ना ही पाकिस्तान। भारत को मिलने वाला राफेल 4.5 जेनरेशन वाला मल्टी रोल फाइटर प्लेन है। इसकी एक और ताकत जो इसे दूसरे जंगी जहाजों से खास बनाती है वो है इसमें लगी स्काल्प मिसाइल। करीब 550 किलोमीटर रेंज वाली ये मिसाइल किसी भी बंकर को आसानी से तबाह कर सकती है। इसका मतलब ये हुआ कि राफेल को दुश्मन के बंकर बर्बाद करने के लिए उसकी सीमा में घुसना नहीं पड़ेगा। याद कीजिए जब भारत ने बालाकोट में आतंकी अड्डों को उड़ाया था तो मिराज 2000 प्लेन को पाकिस्तान के वायुक्षेत्र में जाना पड़ा था। फ्रांस स्काल्प मिसाइल का इस्तेमाल लाबिया और सीरिया में कामयाबी के साथ कर चुका है।


Flying Rafale Jet 

भारतीय वायुसेना को पिछली बार साल 1996 में रूस से खरीदे गए सुखोई के तौर पर लड़ाकू विमानों की खेप मिली थी। 24 साल में भारत की जरूरतें बढ़ी हैं, सामरिक दृष्टि से भारत की सुरक्षा चिंताएं भी बदली हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का रोल बढ़ा है और इन सब जिम्मेदारियों को निभाने में भारतीय वायुसेना को थोड़ी दिक्कत आ रही थी। वायुसेना की ताकत महज 31 स्क्वॉड्रन तक सिमट गई है। चीन और पाकिस्तान के डबल फ्रंट का मुकाबला करने और नई वैश्विक व्यवस्था में अपना रोल निभाने के लिए अगले कुछ साल में भारत को 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत पड़ेगी। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम राफेल के आने से वायुसेना को फिलहाल के लिए धार मिलेगी।

महीने के आखिर में आने वाला राफेल वायुसेना की गौरवशाली गोल्डन ऐरो 17 स्क्वॉड्रन का हिस्सा होगा। राफेल विमानों को हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हाशीमारा एयरबेस पर तैनात किया जाएगा। अंबाला और हाशीमारा एयरबेस पर राफेल की मौजूदगी उत्तरी और पूर्वी वायुक्षेत्र को अभेद्य किले में तब्दील कर देगी। यही वजह है कि राफेल को भारत का ट्रंप कार्ड कहा जा रहा है।      

Monday, 29 June 2020

दिल्ली में मॉनसून की सूखी एंट्री, कुछ तो गड़बड़ है


कुछ तो गड़बड़ है


मॉनसून...मॉनसून...मॉनसून


Monsoon Rain Delhi

अब तो बरसो बदरा

आसमान में अठखेलियां करते बादल और मोतियों सी बरसती बारिश की बूंदें भला किसे अच्छी नहीं लगती हैं। दिल को सुकून सा मिलता है। लेकिन दिल वालों की दिल्ली के लिए इस सुकून का इंतजार थोड़ा लंबा खिंचता जा रहा है। जैसे ही मौसम विभाग ने ये ऐलान किया कि इस बार मॉनसून दिल्ली को तय तारीख से पहले भिगोने पहुंच गया है, दिल्ली छतरी खोलकर और रेनकोट निकालकर बैठ गई। प्री मॉनसून बारिश का ट्रेलर इतना अच्छा था कि लोगों को पक्का भरोसा हो गया था कि मॉनसून की पूरी पिक्चर सुपरहिट होगी। 

Delhi Weather


वैसे भी जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, दिल्ली में कुछ अच्छा तो हो नहीं रहा है। ऐसे में हर कोई अपने-अपने तरीके से मॉनसून को वेलकम करने के लिए तैयार था। कोरोना काल में ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं तो पकौड़ियों के लिए बेसन और प्याज का स्टॉक भी जमा हो गया। टीवी चैनलों से लेकर अखबार की हेडलाइंस में आ गया कि मॉनसून दिल्ली पहुंच गया है।

Clouds


गर्मागर्म पकौड़ियों की प्लेट हाथ में पकड़कर और गर्म चाय की प्याली लेकर पहला दिन बादलों के बरसने के इंतजार में पूरा बीत गया लेकिन बादलों ने मानो दिल्ली को चिढ़ाने की कसम खा रखी थी। बादल बस ऊपर से दिल्ली को निहारते रहे। लगा कि दूसरे दिन तो बादल पक्का बरसेंगे, लेकिन बादलों ने दूसरे दिन भी धोखा दे दिया। इसी बीच दिल्ली वालों को जलाने के लिए ये खबर भी आ गई कि बरखा बहार ने पूरे देश को अपने आगोश में ले लिया है। पूरे देश पर मॉनसून के बादल छा गए हैं। कहते हैं ना कि हवाओं पर किसी का बस नहीं चलता। भले ही दिल्ली से पूरे देश पर राज किया जाता है, भले ही दिल्ली सत्ता का केंद्र है, फिर भी बादलों की ये गुस्ताखी... कुछ तो गड़बड़ है!!! 

चुनाव अमेरिका में और पासे चले जा रहे हैं रूस-चीन में

  2020 के बाद अमेरिका को कौन चलाएगा ? अमेरिका तो अपना राष्ट्रपति तक अपनी पसंद से नहीं चुन सकता है ! पुतिन साहब चाहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप दो...